#wrong time
#___चढ़ता_सूरज_धीरे_धीरे_ढलता_है_ढल_जाएगा___
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विकट दौर चल रहा है ,ये भी चला जायेगा एक दिन । मुसीबतें अक्सर इम्तिहान के लिए आती है..औऱ इम्तिहान का परिणाम घोषित होता है ना कि अनन्त दौर तक चलता है ।मजहब बदनाम हो जाएंगे ,समाज सेवी कलंकित हो उठेंगे ,राजा प्रसिद्ध हो जाएगा औऱ प्रजा के हाथ जल जाएंगे । मगर सुख से वही रहेगा जो सच्चा औऱ अच्छा है । तिरंगे के नीचे कपटी औऱ ईमानदारों की भीड़ है। हमें आस लगाने के लिए स्वतंत्रता से 'चुनने का अधिकार' चाहिए मगर बिना किसी लालच औऱ भय के ।
जो आगे जा रहा है उसकी गति को माप नहीं सकते हम ,लेकिन जो पीछे है उसे आत्मचिंतन के लिए प्रेरित जरूर कर सकते हैं । चारों तरफ एक ऐसा वातावरण बनाया जा रहा है जिससे आप कुछ सोच ना सके ,कर ना सके ,औऱ बता न सके ।चारों ओर धर्म की बंदिशें है जिसे तोड़ने पर स्वर्ग और नरक की चिंता है ,औऱ यहां जीते जी समाज और समुदाय का ख़ौफ़ है । परिवार और पुरखों की लाज सर्वोपरि है मगर आधुनिकता आज भी ख्याली बातों में विद्यमान है ।
जो ज्यादा उठेगा वो एक दिन गिरेगा क्योंकि उसके उठने में सत्य से ज्यादा झूठ और दिखावा है और जिसे सत्य उठाएगा उसे कोई गिरा ना पायेगा । तुम्हे जो सीखाया गया है वो करो ,तुम्हे जिस चीज से रोका गया है उससे दूर हो जाओ । प्रकृति को अब सुकून है ,धार्मिक स्थल बन्द है ... भगवान को आज दान और चंदे की जरूरत नहीं है । भगवान पीपल के पेड़ के नीचे भी उसी दिव्य शक्तियों के साथ था जो आज ईंट पत्थर के आलीशान इमारतों में हैं । खुदा के पास बन्दों की पुकार उस कच्ची मिट्टी की मस्जिदों से ज्यादा क्यों जाती थी जो आज करोड़ों रुपयों से बनाई मस्जिद से नहीं जा पा रही है ?
आस्तिको के बीच नास्तिक लोग आदिम काल से आधुनिक काल तक रह रहे हैं... वो खुश है । कभी सोचा कि उनकी मन्नतें पूरी कौन कर रहा है ? उनके दुख कौन मिटा रहा है? उनका भी कनेक्शन उसी ईश्वर से है जो आपका है ,परन्तु उनका रिश्ता बाईपास होकर जाता है यानी कि दिल की सच्चाई से ।बाह्य आडंबरों से दूर है वों ,लेकिन तुम लोग धार्मिक होकर भी विष से भरे पड़े हो ।
तुम्हारे इतिहास में लड़ाई औऱ खून खराबा भरा पड़ा है.. बस तुम लोगों ने 'बुराई पर अच्छाई की जीत' का नाम दे दिया ।तुम लोगों ने भी तलवारे उठाई थी,बस उसे 'परवरदिगार का हुक्म' घोषित कर दिया । आज भी तुम वही हो ... क्योंकि प्रेम,शांति ,बलिदान ,त्याग आदि ये सब तो केवल नाम के रह गए हैं । खैर !छोड़ो क्या फायदा इन सब बातों का ? अब भी आत्मचिंतन की ओर अग्रसर हो जाओ ,पूरे विश्व में 'कोरोना' नामक महामारी का ख़ौफ़ है... एक वायरस ने सबको हिला कर रख दिया ,तो सोच लो तुम्हारी औऱ मेरी कितनी बड़ी औकात है ?
ईश्वर-अल्लाहः सब वहीं हैं जहां थे..बस अनुयायी नकली हो गए ।तुम खुश हो बुराई की पोटली एक दूसरे के सिर पर रखने में । तुम बिगड़ गए अपने ज्ञान से , तुम पथभ्रष्ट हो गए अपनी शान से ,तुम अंधे हो गए शोहरत से ।तुम तुच्छ हो उस प्रकृति और ईश्वर के सामने ,याद रखना वो आज भी सर्वश्रेष्ठ है और अनन्त काल तक रहेगा । उसे तुम्हारी ऐसी झूठी भक्ति ,झूठे चढ़ावे ,झूठे पहनावे से कोई मतलब नहीं है और ना ही जरूरत है ।
घड़ी उल्टी चल रही है टिक-टिक करकर... अब भी सम्भल जाओ और छोड़ दो ये नफरत । त्याग दो ये स्वयं से ही निर्धारित किया हुआ रुत्बा । बताओ अगली मिनट कौन जिंदा रहने का वादा कर सकता है ? मुझे पता है कोई नहीं कर सकता औऱ जो कर सकता है उससे बड़ा कोई मूर्ख नहीं है ।
फिक्र ना करो ,ये इम्तिहान है बस । सब कुछ ठीक हो जाएगा । घर पर रहो औऱ सुरक्षित रहो । आत्मचिंतन करो पिछले कर्मों को लेकर ,योजनाएं बनाओ सुकर्मों की ,भलाई की ...देखना जल्द ही ये कोविड-19 नष्ट हो जाएगा ।समाज सेवा के नाम पर खुद को प्रदर्शित मत करो । मेरा ,मैं ,हम ... ये सब प्रदर्शित करना ही तुम्हारे अंत की शुरुआत है ।
कुछ बातें जो 'संसार और मार्ग :ओशो' किताब से लिख कर विराम देता हूँ :-
"प्रेम , सत्य , निष्ठा ,सादगी और निर्दोषता यह सभी अस्तित्वगत है ।इनके सब कुछ विपरीत भाव मन से संबंधित है और इस विपरीत को छिपाने के लिए मन नकली सिक्के ,नकली निष्ठा उत्पन्न कर तमाम वादे करता है, नकली प्रेम प्रदर्शित करता है ,गारंटी देता है, नकली सौंदर्य का दिखावा करते हुए अपनी आंतरिक कुरूपता को छुपाता है और जो कुछ करता है उसे कर्तव्य के नाम से महिमामंडित करता है। ये नकली सिक्के उत्पन्न कर, मन किसी और को नहीं स्वयं अपने आपको ही धोखा देता है। "
#Navedkhan


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